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Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:

आज की लय

सुनें · 18.43–18.48
सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?

शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्

दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्

॥ १८.४३ ॥

शूरवीरता, तेज, धैर्य, चतुरता और युद्ध में न भागना, दान देना और स्वामिभाव—ये सब-के-सब ही क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है