दिन 118 / 126

Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:

आज की लय

सुनें · 18.31–18.36
सस्वर पाठ
▶
पढ़ें · 18.31–18.36
6 श्लोक · अनुवाद
→
मनन

यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?

यया धर्ममधर्मं च कार्यं चाकार्यमेव च

अयथावत्प्रजानाति बुद्धिः सा पार्थ राजसी

॥ १८.३१ ॥

हे पार्थ! मनुष्य जिस बुद्धि के द्वारा धर्म और अधर्म को तथा कर्तव्य और अकर्तव्य को भी यथार्थ नहीं जानता, वह बुद्धि राजसी है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है