दिन 117 / 126
Mokṣa Sannyāsa Yoga
मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 18.25–18.30
सस्वर पाठ
पढ़ें · 18.25–18.30
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्
मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते
॥ १८.२५ ॥
जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्य को न विचार कर केवल अज्ञान से आरम्भ किया जाता है—वह तामस कहा जाता है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है