दिन 116 / 126
Mokṣa Sannyāsa Yoga
मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 18.19–18.24
सस्वर पाठ
पढ़ें · 18.19–18.24
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?
ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः
प्रोच्यते गुणसंख्याने यथावच्छृणु तान्यपि
॥ १८.१९ ॥
गुणों की संख्या करने वाले शास्त्र में ज्ञान और कर्म तथा कर्ता गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार के ही कहे गये हैं, उनको भी तू मुझसे भलीभाँति सुन।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है