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Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:

आज की लय

सुनें · 18.19–18.24
सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?

ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः

प्रोच्यते गुणसंख्याने यथावच्छृणु तान्यपि

॥ १८.१९ ॥

गुणों की संख्या करने वाले शास्त्र में ज्ञान और कर्म तथा कर्ता गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार के ही कहे गये हैं, उनको भी तू मुझसे भलीभाँति सुन।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है