दिन 113 / 126
Mokṣa Sannyāsa Yoga
मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 18.1–18.6
सस्वर पाठ
पढ़ें · 18.1–18.6
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?
अर्जुन उवाच
संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्
त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन
॥ १८.१ ॥
अर्जुन बोले—हे महाबाहो! हे अन्तर्यामिन्! हे वासुदेव! मैं संन्यास और त्याग के तत्त्व को पृथक्-पृथक् जानना चाहता हूँ।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है