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Śraddhātraya Vibhāga Yoga

श्रद्धात्रय विभाग योग · अध्याय 17:

आज की लय

सुनें · 17.24–17.28
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

क्या मेरी छोटी-छोटी दैनिक आदतें उस व्यक्ति को गढ़ रही हैं, जो मैं बनना चाहता हूँ?

तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः

प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम्

॥ १७.२४ ॥

इसलिये वेदमन्त्रों का उच्चारण करने वाले श्रेष्ठ पुरुषों की शास्त्रविधि से नियत यज्ञ, दान और तपरूप क्रियाएँ सदा 'ॐ' इस परमात्मा के नाम को उच्चारण करके ही आरम्भ होती हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है