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Śraddhātraya Vibhāga Yoga

श्रद्धात्रय विभाग योग · अध्याय 17:

आज की लय

सुनें · 17.19–17.23
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

क्या मेरी छोटी-छोटी दैनिक आदतें उस व्यक्ति को गढ़ रही हैं, जो मैं बनना चाहता हूँ?

मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः

परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम्

॥ १७.१९ ॥

जो तप मूढतापूर्वक हठ से, मन, वाणी और शरीर की पीड़ा के सहित अथवा दूसरे का अनिष्ट करने के लिये किया जाता है—वह तप तामस कहा गया है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है