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Śraddhātraya Vibhāga Yoga

श्रद्धात्रय विभाग योग · अध्याय 17:

आज की लय

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सस्वर पाठ
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6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

क्या मेरी छोटी-छोटी दैनिक आदतें उस व्यक्ति को गढ़ रही हैं, जो मैं बनना चाहता हूँ?

विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम्

श्रद्धाविरहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते

॥ १७.१३ ॥

शास्त्रविधि से हीन, अन्नदान से रहित, बिना मन्त्रों के, बिना दक्षिणा के और बिना श्रद्धा के किये जाने वाले यज्ञ को तामस यज्ञ कहते हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है