दिन 109 / 126

Śraddhātraya Vibhāga Yoga

श्रद्धात्रय विभाग योग · अध्याय 17:

आज की लय

सुनें · 17.7–17.12
सस्वर पाठ
▶
पढ़ें · 17.7–17.12
6 श्लोक · अनुवाद
→
मनन

क्या मेरी छोटी-छोटी दैनिक आदतें उस व्यक्ति को गढ़ रही हैं, जो मैं बनना चाहता हूँ?

आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः

यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं श्रृणु

॥ १७.७ ॥

भोजन भी सबको अपनी-अपनी प्रकृति के अनुसार तीन प्रकार का प्रिय होता है। और वैसे ही यज्ञ, तप और दान भी तीन-तीन प्रकार के होते हैं। उनके इस पृथक्-पृथक् भेद को तू मुझसे सुन।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है