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Śraddhātraya Vibhāga Yoga
श्रद्धात्रय विभाग योग · अध्याय 17:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 17.7–17.12
सस्वर पाठ
पढ़ें · 17.7–17.12
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
क्या मेरी छोटी-छोटी दैनिक आदतें उस व्यक्ति को गढ़ रही हैं, जो मैं बनना चाहता हूँ?
आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः
यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं श्रृणु
॥ १७.७ ॥
भोजन भी सबको अपनी-अपनी प्रकृति के अनुसार तीन प्रकार का प्रिय होता है। और वैसे ही यज्ञ, तप और दान भी तीन-तीन प्रकार के होते हैं। उनके इस पृथक्-पृथक् भेद को तू मुझसे सुन।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है