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Daivāsura Sampad Vibhāga Yoga

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · अध्याय 16:

आज की लय

सुनें · 16.19–16.24
सस्वर पाठ
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पढ़ें · 16.19–16.24
6 श्लोक · अनुवाद
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मनन

आज मैं किस वृत्ति को पोषित कर रहा हूँ — उदार वाली को, या लोभी वाली को?

तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान्

क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु

॥ १६.१९ ॥

उन द्वेष करने वाले पापाचारी और क्रूरकर्मी नराधमों को मैं संसार में बार-बार आसुरी योनियों में ही डालता हूँ।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है