दिन 107 / 126
Daivāsura Sampad Vibhāga Yoga
दैवासुर सम्पद् विभाग योग · अध्याय 16:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 16.19–16.24
सस्वर पाठ
पढ़ें · 16.19–16.24
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
आज मैं किस वृत्ति को पोषित कर रहा हूँ — उदार वाली को, या लोभी वाली को?
तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान्
क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु
॥ १६.१९ ॥
उन द्वेष करने वाले पापाचारी और क्रूरकर्मी नराधमों को मैं संसार में बार-बार आसुरी योनियों में ही डालता हूँ।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है