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Daivāsura Sampad Vibhāga Yoga
दैवासुर सम्पद् विभाग योग · अध्याय 16:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 16.13–16.18
सस्वर पाठ
पढ़ें · 16.13–16.18
6 श्लोक · अनुवाद
मनन
आज मैं किस वृत्ति को पोषित कर रहा हूँ — उदार वाली को, या लोभी वाली को?
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम्
इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम्
॥ १६.१३ ॥
वे सोचा करते हैं कि मैंने आज यह प्राप्त कर लिया है और अब इस मनोरथ को प्राप्त कर लूँगा। मेरे पास यह इतना धन है और फिर भी यह हो जायेगा।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है