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Puruṣottama Yoga
पुरुषोत्तम योग · अध्याय 15:
कर्म
भक्ति
ज्ञान
आज की लय
सुनें · 15.16–15.20
सस्वर पाठ
पढ़ें · 15.16–15.20
5 श्लोक · अनुवाद
मनन
मैं किस वस्तु से चिपका हुआ हूँ, जिसे थोड़ा और हल्के से थाम सकता हूँ?
द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च
क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते
॥ १५.१६ ॥
इस संसार में नाशवान् और अविनाशी भी, ये दो प्रकार के पुरुष हैं। इनमें सम्पूर्ण भूत प्राणियों के शरीर तो नाशवान् और जीवात्मा अविनाशी कहा जाता है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है