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Puruṣottama Yoga

पुरुषोत्तम योग · अध्याय 15:

आज की लय

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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

मैं किस वस्तु से चिपका हुआ हूँ, जिसे थोड़ा और हल्के से थाम सकता हूँ?

यतन्तो योगिनश्चैनं पश्यन्त्यात्मन्यवस्थितम्

यतन्तोऽप्यकृतात्मानो नैनं पश्यन्त्यचेतसः

॥ १५.११ ॥

यत्न करने वाले योगी जन भी अपने हृदय में स्थित इस आत्मा को तत्त्व से जानते हैं; किंतु जिन्होंने अपने अन्तःकरण को शुद्ध नहीं किया है, ऐसे अज्ञानीजन तो यत्न करते रहने पर भी इस आत्मा को नहीं जानते।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है