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Puruṣottama Yoga

पुरुषोत्तम योग · अध्याय 15:

आज की लय

सुनें · 15.6–15.10
सस्वर पाठ
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5 श्लोक · अनुवाद
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मनन

मैं किस वस्तु से चिपका हुआ हूँ, जिसे थोड़ा और हल्के से थाम सकता हूँ?

न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः

यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम

॥ १५.६ ॥

जिस परमपद को प्राप्त होकर मनुष्य लौटकर संसार में नहीं आते, उस स्वयं प्रकाश परमपद को न सूर्य प्रकाशित कर सकता है, न चन्द्रमा और न अग्नि ही; वही मेरा परमधाम है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है