दिन 6 / 7
Dhyāna Yoga
ध्यान योग · अध्याय 6:
आज की लय
सुनें · 6.5–6.6
सस्वर पाठ
पढ़ें · 6.5–6.6
2 श्लोक · अनुवाद
मनन
क्या आज मैं स्वयं का मित्र बन रहा हूँ, या अपना ही शत्रु?
उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः
॥ ६.५ ॥
अपने द्वारा अपना संसार-समुद्र से उद्धार करे और अपने को अधोगति में न डाले, क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है