दिन 4 / 7

Sāṅkhya Yoga

साङ्ख्य योग · अध्याय 2:

आज की लय

सुनें · 2.62–2.63
सस्वर पाठ
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2 श्लोक · अनुवाद
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मनन

कौन-सी लालसा, यदि मैं उसके अन्त तक जाऊँ, मुझे अशान्त कर देती है?

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते

सङ्गात् संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते

॥ २.६२ ॥

विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है