दिन 2 / 7

Sāṅkhya Yoga

साङ्ख्य योग · अध्याय 2:

आज की लय

सुनें · 2.47–2.48
सस्वर पाठ
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2 श्लोक · अनुवाद
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मनन

क्या मैं इसमें अपना पूरा प्रयास लगाकर परिणाम को छोड़ सकता हूँ?

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि

॥ २.४७ ॥

तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिये तू कर्मों के फलका हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है