दिन 9 / 18

Rāja Vidyā Rāja Guhya Yoga

राज विद्या राज गुह्य योग · अध्याय 9:

आज की लय

सुनें · 9.1–9.34
सस्वर पाठ
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34 श्लोक · अनुवाद
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मनन

आज मैं कौन-सी छोटी-सी वस्तु सच्चे मन से अर्पित कर सकता हूँ?

श्री भगवानुवाच

इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे

ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्

॥ ९.१ ॥

श्रीभगवान्बोले—तुझ दोष दृष्टि रहित भक्त के लिये इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः भलीभाँति कहूँगा, जिसको जानकर तू दुःख रूप संसार से मुक्त हो जायेगा।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है