दिन 8 / 18

Akṣara Brahma Yoga

अक्षर ब्रह्म योग · अध्याय 8:

आज की लय

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मनन

यदि यही मेरी अन्तिम साँस हो, तो मेरा मन किस ओर मुड़ेगा?

अर्जुन उवाच

किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम

अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते

॥ ८.१ ॥

अर्जुन ने कहा—हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत नाम से क्या कहा गया है और अधिदैव किसको कहते हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है