दिन 3 / 18
Karma Yoga
कर्म योग · अध्याय 3:
आज की लय
सुनें · 3.1–3.43
सस्वर पाठ
पढ़ें · 3.1–3.43
43 श्लोक · अनुवाद
मनन
मैं कहाँ केवल फल के लिए ही कर्म कर रहा हूँ?
अर्जुन उवाच
ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन
तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव
॥ ३.१ ॥
अर्जुन बोले—हे जनार्दन! यदि आपको कर्म की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ मान्य है तो फिर हे केशव! मुझे भयंकर कर्म में क्यों लगाते हैं?
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है