दिन 18 / 18

Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष सन्न्यास योग · अध्याय 18:

आज की लय

सुनें · 18.1–18.78
सस्वर पाठ
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78 श्लोक · अनुवाद
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मनन

यह सारा भार अकेले ढोना छोड़ देना कैसा लगेगा?

अर्जुन उवाच

संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्

त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन

॥ १८.१ ॥

अर्जुन बोले—हे महाबाहो! हे अन्तर्यामिन्! हे वासुदेव! मैं संन्यास और त्याग के तत्त्व को पृथक्-पृथक् जानना चाहता हूँ।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है