दिन 15 / 18
Puruṣottama Yoga
पुरुषोत्तम योग · अध्याय 15:
आज की लय
सुनें · 15.1–15.20
सस्वर पाठ
पढ़ें · 15.1–15.20
20 श्लोक · अनुवाद
मनन
मैं किस वस्तु से चिपका हुआ हूँ, जिसे थोड़ा और हल्के से थाम सकता हूँ?
श्री भगवानुवाचऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्
॥ १५.१ ॥
श्रीभगवान् बोले-आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं; तथा वेद जिसके पत्ते कहे गये हैं-उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्त्व से जानता है, वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है।
अनुवाद
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है