दिन 14 / 18

Guṇatraya Vibhāga Yoga

गुणत्रय विभाग योग · अध्याय 14:

आज की लय

सुनें · 14.1–14.27
सस्वर पाठ
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27 श्लोक · अनुवाद
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मनन

इस समय कौन-सा भाव मुझे चला रहा है — और क्या मैं उसे बस देख भर सकता हूँ?

श्री भगवानुवाचपरं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्

यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः

॥ १४.१ ॥

श्रीभगवान् बोले-ज्ञानों में भी अति उत्तम उस परम ज्ञान को मैं फिर कहूँगा, जिसको जानकर सब मुनिजन इस संसार से मुक्त होकर परम सिद्धि को प्राप्त हो गये हैं।

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है