दिन 13 / 18
Kṣetra Kṣetrajña Vibhāga Yoga
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · अध्याय 13:
आज की लय
सुनें · 13.1–13.34
सस्वर पाठ
पढ़ें · 13.1–13.34
34 श्लोक · अनुवाद
मनन
वह कौन है जो इस सबको चुपचाप बीतते हुए देख रहा है?
अध्याय 13 · भूमिका
अर्जुन उवाच
प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च
एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव
यह आरंभिक श्लोक गीता की कुछ पाठ-परंपराओं में मिलता है; पारंपरिक क्रम 13.1 से शुरू होता है।
आज पूरा करने से आपका दीया जलता है