दिन 12 / 18

Bhakti Yoga

भक्ति योग · अध्याय 12:

आज की लय

सुनें · 12.1–12.20
सस्वर पाठ
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20 श्लोक · अनुवाद
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मनन

ऐसा क्या है जिससे मैं इतना प्रेम करता हूँ कि बार-बार उसी की ओर लौट आता हूँ?

अर्जुन उवाचएवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते

येचाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः

॥ १२.१ ॥

अर्जुन बोले-जो अनन्य प्रेमी भक्तजन पूर्वोक्त प्रकार से निरन्तर आपके भजन-ध्यान में लगे रहकर आप सगुणरूप परमेश्वर को और दूसरे जो केवल अविनाशी सच्चिदानन्दधन निराकार ब्रह्मको ही अतिश्रेष्ठ भाव से भजते हैं-उन दोनों प्रकार के उपासकों में अति उत्तम योगवेत्ता कौन हैं?

अनुवाद

आज पूरा करने से आपका दीया जलता है